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    Table of content
  1. धनुरासन का अर्थ | Dhanurasana (Bow pose) meaning
  2. धनुरासन की विधि | dhanurasana steps
  3. Dhanurasana लगाने की अवधि।
  4. Dhanurasana की सावधानियां

धनुरासन के लाभ | Dhanurasana Benefits ,Steps and Precautions

धनुरासन का अर्थ | Dhanurasana (Bow pose) meaning

पेट की चर्बी कम करने के आसन

धनुरासन शब्द धनु + आसन 2 शब्दों से मिलकर बना है, जिसमे धनु का अर्थ धनुष है , इस आसन में शरीर की आकृति धनुष के समान बनाई जाती है।

Dhanurasana श्रेष्ठ आसनों में से एक है, इस आसन से संपूर्ण शरीर का बहुत अच्छा व्यायाम (exerxise) होता है। यह आसन लाभ की दृष्टि से रीढ़ के लिए विशेष है, परंतु यह आसन संपूर्ण शरीर को ही निरोगी करने में समर्थ है। इसके अभ्यास से न जाने कितने ही रोगों का निवारण हो जाता है।

धनुसारासन के लाभ | Dhanurasana benefits

यह एक ऐसा आसन है जिसका जितना गुणगान किया जाए कम ही लगता है, क्योंकि इसे प्रतिदिन करने वाले के शरीर की ऊर्जा देख कर ही आप समझ जाएंगे, की ये आसन कितना श्रेष्ठ है , dhanurasana के अभ्यास से होने वाले लाभ निम्नलिखित हैं -

आप भी चकित हो गए हो गए होंगे न...!!!!! इस आसन के इतने सारे लाभ देख कर।

जी हां यह आसन आपको नियमित रूप से करना चाहिए, धनुरासन सभी आयु के हर वर्ग के स्त्री पुरुष सभी कर सकते हैं बल्कि करना ही चाहिए।

आइए आपको अब इस दिव्य आसन को करने की विधि बताते हैं -

धनुरासन की विधि | dhanurasana steps

Baddha-padmasana

चलिए बहुत पढ़ लिए dhanurasana के benefits, अब सिर्फ पढ़ने से कुछ नही होता ,अब इसको करने की बारी है😏। सबसे पहले एक कंबल या दरी बिछा लीजिए भूमि पर -

  1. कंबल पर उलटे लेट जाइए चित्त को स्थिर करने का प्रयास करें ,मन को अपने ईष्ट देव पर एकाग्र कीजिए ,और उनसे प्रार्थना 🙏😌 करें की आपके शरीर के सभी रोगों का नाश हो और आपका मन शुद्ध हो।
  2. ध्यान रहे कि आपके हाथ एकदम सीधे रहें और कमर से चिपके रहें , पैर भी एकदम सीधे ऐड़ी से ऐड़ी चिपकी रहे।
  3. अब दोनो हाथो से अपने टकनो को पकड़ें और गहरी सांस भरते हुए सिर ,गर्दन ,सीने को आगे ऊपर की तरफ उठाएं और दोनो पैरों को खींचे और ऊपर उठाएं ( ध्यान रखें कि दोनो घुटने आपस में चिपके रहें और कोहनी एकदम सीधी रहे और दृष्टि को सामने या थोड़ा ऊपर एकाग्र रखें)।
  4. प्रयास करें की नाभी का हिस्सा ही भूमि पर हो, सिर से लेकर पैरों तक धनुष की आकृति बनाएं।
  5. सिर और पैर दोनो समान ऊंचाई तक उठने का प्रयास करें जितना संभव हो सकते उतना ही।
  6. जितनी देर तक सांस को अंदर रोके रख सकते हैं उतनी देर तक प्रयास करें।
  7. अब सांस छोड़ते हुए धीरे धीरे पैरों को वापिस नीचे ले आएं और गर्दन को भी नीचे लाकर माथा भूमि से टेक लें।
  8. ऐसे ही जी 4-5 बार तक करें।

Dhanurasana लगाने की अवधि।

आरंभ में इस आसन को सिर्फ 5 - 5 सेकंड तक ही लगाएं, जब धीरे-धीरे सांस रोकने में सरलता होने लगे और शरीर लचीला होता जाए, तो इसको लगाने की अवधि बढ़ते जाएं।

जिनकी आरंभ में सांस रोकने में कठिनाई लगती है वे लोग बिना सांस रोक भी लगा सकते हैं, अर्थात सामान्य रूप से सांस लेते छोड़ते रहें और आसन को 10-10 सेकंड तक ही लगाएं।

जिनके शरीर में चर्बी के कारण या शरीर टाइट होने के कारण दोनो घुटने सटाकर वे dhanurasana नही लगा पाते , वे लोग दोनो घुटनों में 1 - 1.5 फीट तक का gap रख कर लगा सकते हैं, जैसे जैसे शरीर लचीला होता जाए वैसे वैसे घुटनों को पास लाकर लगाने का प्रयास करें। इसकी अवधि हर हफ्ते 5-5 सेकंड्स तक बढ़ाते जाएं ,और धैर्य पूर्वक बिना जोर जबरदस्ती के धीरे धीरे इसको लगाने के समय को 1 मिनट तक ले जाएं।

Dhanurasana की सावधानियां -

Conclusion

अगर आप हमारी बताई हुई विधि से इन सभी आसनों का अभ्यास नित्य प्रतिदिन 6 से 8 महीनों तक करेंगे तो अवश्य ही आपको आपके मन के अनुरूप परिणाम अवश्य मिल जाएगा।

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